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  Welcome to Shri Sidhdat...  
Then I felt I should attend at least one satsang but because I was in Abu Dhabi I never used to be present at the time of satsang. But luckily there was once a public holiday and I happened to be in Dubai at the time of satsang, after which I started praying to GuruMaharaj that I be given more satsang privilege.
इसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मुझे कम से कम एक सत्संग में तो जरूर जाना चाहिए क्योंकि मैं आबु धाबी में था, इसलिए मैं सत्संग के समय पर उपस्थित नहीं हो सकता था। लेकिन सौभाग्य वश एक सार्वजनिक अवकाश का दिन था, तथा सत्संग के समय मैं दुबई में ही था, और इसके बाद मैंने गुरू महाराज से प्रार्थना करनी शुरू की मुझे सत्संग सुनने का अवसर दें।
  Welcome to Shri Sidhdat...  
It all started when I came to the U.A.E in 1999 and landed with a job in Abu Dhabi. Although I was not eager to go to Abu Dhabi I took the offer as I was a fresh graduate and I couldn't be a chooser. To tell you the truth I was a complete atheist in my values at that time, I used to hear from my sister in Dubai that they attend GuruMaharajs satsang once in a week.
इस सभी की शुरूआत 1999 में हुई जब मैं यू.ए.ई. में आया था तथा आबू धाबी हवाई अड्डे पर उतरा था। हालांकि मैं आबू धाबी जाने के लिए इतना उत्सुक नहीं था, लेकिन मैंने इस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मैंने अभी हाल ही में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी तथा मेरे पास विकल्प चुनने की योग्यता नहीं थी। आपको सच्चाई बताऊं तो मैं हमेशा से ही जीवन के मूल्यों के प्रति नास्तिकता की ही सोच रखता था, मेरी बहन मुझे दुबई से यह बताया करती थी कि वे गुरू महाराज जी के सत्संग को एक सप्ताह में एक बार सुनते हैं। मैंने गुरू महाराज जी की तस्वीर भी नहीं देखी थी तथा उन्हें जानता भी नहीं था। मेरा धार्मिक बनने की तथा सत्संग सुनने की कोई इतनी इच्छा भी नहीं थी।
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I felt the job was tailor made for me as it suited my requirements so well. I got my driving license from Abu Dhabi in a record time with least amount of money spent on it. Suddenly in a few months I realized life was too good to me.
मुझे दुबई में एक बार गोविन्द अंकल से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ तथा उस दिन से मेरा जीवन परिवर्तित हो गया। कुछ महीनों बाद मुझे शारजाह में नौकरी मिली, और यह बात गोविन्द अंकल मुझे पहले से ही बता चुके थे। लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि मेरी नौकरी बिलकुल वैसी ही थी जैसा मैं चाहता था। मुझे महसूस हुआ कि यह नौकरी केवल मेरे लिए खास तौर पर तैयार की गई है और यह मेरी अपेक्षाओं के अनुरूप भी है। मुझे आबू धाबी में बहुत ही कम समय में अपना ड्राईविंग लाईसेंस प्राप्त हुआ तथा इस पर बहुत ही कम पैसा खर्च हुआ। अचानक ही कुछ महीनों में मैंने यह अनुभव किया कि जीवन मेरे लिए कितना अच्छा है.
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It all started when I came to the U.A.E in 1999 and landed with a job in Abu Dhabi. Although I was not eager to go to Abu Dhabi I took the offer as I was a fresh graduate and I couldn't be a chooser. To tell you the truth I was a complete atheist in my values at that time, I used to hear from my sister in Dubai that they attend GuruMaharajs satsang once in a week.
इस सभी की शुरूआत 1999 में हुई जब मैं यू.ए.ई. में आया था तथा आबू धाबी हवाई अड्डे पर उतरा था। हालांकि मैं आबू धाबी जाने के लिए इतना उत्सुक नहीं था, लेकिन मैंने इस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मैंने अभी हाल ही में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी तथा मेरे पास विकल्प चुनने की योग्यता नहीं थी। आपको सच्चाई बताऊं तो मैं हमेशा से ही जीवन के मूल्यों के प्रति नास्तिकता की ही सोच रखता था, मेरी बहन मुझे दुबई से यह बताया करती थी कि वे गुरू महाराज जी के सत्संग को एक सप्ताह में एक बार सुनते हैं। मैंने गुरू महाराज जी की तस्वीर भी नहीं देखी थी तथा उन्हें जानता भी नहीं था। मेरा धार्मिक बनने की तथा सत्संग सुनने की कोई इतनी इच्छा भी नहीं थी।